Paheli in Hindi with answer
यहां पढ़िए 100 मज़ेदार paheli in hindi with answer, यानी उत्तर सहित हिंदी पहेलियां, जो बच्चों, बड़ों और पूरे परिवार के लिए एक जगह जमा की गई हैं। हर पहेली छोटी, तुकबंदी वाली और सरल हिंदी में है, ताकि पढ़ते ही बूझने का मन करे।
सबसे पहले आसान पहेलियां हैं, फिर रोज़ की चीज़ें, जानवर और पक्षी, फल और सब्ज़ियां, शरीर के अंग और प्रकृति। आख़िर में 10 कठिन पहेलियां हैं जो बड़ों का भी दिमाग़ घुमा देंगी। पहले ख़ुद सोचिए, फिर उत्तर देखिए।
आसान पहेलियां
पहेली 1
रात को आता, दिन में जाता, ठंडी-ठंडी रोशनी लाता। कभी पूरा, कभी आधा दिखता, बच्चों का वो मामा लगता।
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चांदपहेली 2
सुबह-सुबह पूरब से आए, सारे जग को रोज़ जगाए। शाम ढले पश्चिम में जाए, बूझो कौन उजाला लाए?
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सूरजपहेली 3
दीवार पे टंगा एक काला शीशा, रिमोट दबाओ तो दिखे तमाशा।
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टीवीपहेली 4
पानी में रहती, पानी में सोती, बाहर निकालो तो जान है खोती।
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मछलीपहेली 5
चार पैर और एक पीठ, फिर भी चल न पाऊं, थका-हारा जो भी आए, उसको मैं बिठाऊं।
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कुर्सीपहेली 6
सफ़ेद हूं, मीठी हूं, चाय में घुल जाती, चींटी मुझको ढूंढ़े, हर मिठाई में आती।
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चीनीपहेली 7
पन्ने-पन्ने अक्षर छपे, जिल्द मेरा कपड़ा, बस्ते में मैं रोज़ चलूं, पढ़ ले जिसने पकड़ा।
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किताबपहेली 8
गोल-मटोल उछलती जाऊं, बार-बार टप्पा खाऊं, बल्ले से या पैर से मारो, फिर भी दौड़ी आऊं।
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गेंदपहेली 9
धागा मेरे पेट में, मोम मेरा तन, जलकर करूं उजाला, घटता जाए बदन।
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मोमबत्तीपहेली 10
ठंडी-ठंडी, सफ़ेद-सफ़ेद, गर्मी में मन भाए, देर तलक मुट्ठी में रखो, पानी बन बह जाए।
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बर्फ़पहेली 11
दो पहिये, एक घंटी, न पेट्रोल न धुआं, पैडल मारो तो चल दूं, बूझो कौन हुआ?
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साइकिलपहेली 12
रंग-बिरंगी, डोर से बंधी, हवा में उड़ती जाती, कट जाए तो बच्चों की टोली पीछे दौड़ लगाती।
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पतंगपहेली 13
टिक-टिक करती दीवार पे रहती, समय बताती, और कुछ न कहती।
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घड़ीपहेली 14
आगे-पीछे बत्ती जलती, सड़क पे दौड़ी जाए, ढेर सवारी बैठें इसमें, स्टॉप पे रुक-रुक आए।
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बसपहेली 15
चिड़िया नहीं, पर पंख हैं मेरे, आसमान में जाऊं, सैकड़ों लोगों को बिठाकर दूर देश पहुंचाऊं।
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हवाई जहाज़
रोज़मर्रा की चीज़ों की पहेलियां
पहेली 16
दांत हैं पर काटे नहीं, बालों में घूमे रोज़, उलझन सारी सुलझा दे, बूझो इसकी खोज।
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कंघीपहेली 17
छोटी सी डंडी, सिर पर बाल, सुबह-शाम चमकाए दांतों का हाल।
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टूथब्रशपहेली 18
दरवाज़े पर लटका रहता, पहरा देता सारी रात, चाबी आए तो मुंह खोले, वरना न माने कोई बात।
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तालापहेली 19
बिजली से जो गर्म हो जाए, सिलवट दूर भगाए, कपड़ों पर जब फिसले तो सब सीधा कर जाए।
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इस्त्री (प्रेस)पहेली 20
दो आंखों पर चढ़ बैठा, कानों को पकड़े रहता, धुंधला-धुंधला साफ़ करे, नाक पे बोझा सहता।
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चश्मापहेली 21
बारिश में सिर पर तनता, धूप में भी काम आए, काम ख़त्म तो मुड़-तुड़कर कोने में सो जाए।
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छातापहेली 22
हाथ धोते समय घिसता जाऊं, झाग बनाऊं ढेर, हर दिन थोड़ा छोटा होऊं, मैल भगाऊं फेर।
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साबुनपहेली 23
खाना ठंडा रखती हूं, दूध को फटने न दूं, दरवाज़ा खोलो तो अंदर से ठंडी रोशनी दूं।
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फ्रिजपहेली 24
हाथ में पकड़ो, बटन दबाओ, अंधेरे में राह दिखाऊं, सेल से मेरा पेट भरो, तो रात भर साथ निभाऊं।
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टॉर्चपहेली 25
छत से लटके तीन पंख, फिर भी उड़ न पाए, गर्मी के दिनों में सबको ठंडी हवा खिलाए।
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पंखापहेली 26
एक आंख है, धागा लेती, कपड़े जोड़ती जाती, छोटी सी है, चुभ जाए तो उंगली दर्द दिलाती।
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सुईपहेली 27
जो भी आए सामने, उसकी शक्ल दिखाऊं, दायां-बायां उलटा कर दूं, फिर भी सच बतलाऊं।
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आईनापहेली 28
कॉपी पर जो ग़लती हो, उसको झट से मिटाऊं, जितना काम करूं मैं उतना ख़ुद छोटा हो जाऊं।
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रबड़पहेली 29
दो होंठ हैं पर बोले नहीं, काग़ज़-कपड़ा काटे, उंगली डालो और चलाओ, सब कुछ आधा बांटे।
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कैंचीपहेली 30
तवे से उतरी, फूली-फूली, थाली में मुस्काई, गेहूं के आटे से बनी, हर घर ने ये खाई।
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रोटी
जानवरों और पक्षियों की पहेलियां
पहेली 31
हरे पंख, लाल चोंच, पिंजरे में रहता, जो सिखाओ वही दोहराए, मिट्ठू-मिट्ठू कहता।
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तोतापहेली 32
दिन में सोए, रात में जागे, आंखें बड़ी-बड़ी गोल, पूरा सिर पीछे घुमा ले, हू-हू इसके बोल।
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उल्लूपहेली 33
लंबी सूंड, बड़े-बड़े कान, खंभे जैसे पांव, जंगल का सबसे भारी, झूमे जाए गांव।
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हाथीपहेली 34
चार पैर, पीठ पर घर, धीरे-धीरे चलता, डर लगे तो सिर-पैर सब अंदर कर ले, न हिलता।
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कछुआपहेली 35
रेगिस्तान का जहाज़ हूं, पीठ पर मेरे कूबड़, कई दिन बिन पानी रह लूं, चलूं रेत पर बढ़-बढ़।
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ऊंटपहेली 36
धारीदार कोट पहनकर जंगल में घूमे शान से, भारत का राष्ट्रीय पशु, पहचानो इसको नाम से।
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बाघपहेली 37
बारिश में पंख फैलाकर नाचे, नीला गला सजाए, भारत का राष्ट्रीय पक्षी, बूझो क्या कहलाए?
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मोरपहेली 38
मेहनत से दाने ढोए, लाइन बनाकर चलती, छोटी सी है, पर अपने से भारी बोझा ले चलती।
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चींटीपहेली 39
फूल-फूल पर गुनगुन करती, मीठा रस ले आती, छत्ते में सब मिलकर रहतीं, शहद ढेर बनाती।
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मधुमक्खीपहेली 40
म्याऊं-म्याऊं बोले, दूध देख ललचाए, चूहा देखे तो झट से उस पर झपट लगाए।
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बिल्लीपहेली 41
डाल-डाल पर उछले-कूदे, लंबी इसकी पूंछ, केला छीन के भाग जाए, किसी से न ले पूछ।
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बंदरपहेली 42
सबसे लंबी गर्दन वाला, ऊंचे पत्ते खाए, चितकबरा सा कोट पहन, जंगल में इतराए।
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जिराफ़पहेली 43
कुकड़ूं-कूं की बांग दे, सबको सुबह जगाए, सिर पर लाल कलगी पहने, आंगन में इतराए।
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मुर्गापहेली 44
पानी में भी, धरती पर भी, टर्र-टर्र गाता, बारिश आए तो सबसे पहले शोर मचाता।
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मेंढकपहेली 45
पल-पल अपना रंग बदले, डाली पर चुप बैठे, लंबी जीभ से कीड़े पकड़े, आंखें घुमाए ऐंठे।
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गिरगिट
फल और सब्जियों की पहेलियां
पहेली 46
फलों का राजा कहलाऊं, गर्मी में मैं आऊं, पीला-पीला रस भरा, गुठली साथ में लाऊं।
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आमपहेली 47
हरा-हरा बाहर से, अंदर लाल-लाल, काले-काले बीज भरे, गर्मी का कमाल।
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तरबूजपहेली 48
लाल-लाल दाने, एक घर में हज़ार, छिलका मोटा ओढ़े बैठे, बूझो तो जानूं यार।
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अनारपहेली 49
पीला-पीला लंबा सा, छिलका उतार के खाओ, बंदर को भी प्यारा, गुच्छे में घर लाओ।
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केलापहेली 50
जितनी परतें खोलो, उतने आंसू आएं, फिर भी हर सब्ज़ी में सब इसको डलवाएं।
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प्याज़पहेली 51
धरती के नीचे सोता हूं, भूरा मेरा तन, चिप्स बनूं, पराठा बनूं, भाऊं सबका मन।
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आलूपहेली 52
हरी-हरी, लंबी-पतली, तीखी इसकी बात, एक बार जो चबा ले, पानी मांगे साथ।
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हरी मिर्चपहेली 53
लाल-लाल, गोल-गोल, सलाद में सज जाऊं, चटनी बनूं, सॉस बनूं, सबको मैं ललचाऊं।
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टमाटरपहेली 54
बाहर से कड़ा, भीतर से नरम सफ़ेद, अंदर मीठा पानी भरा, बूझो इसका भेद।
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नारियलपहेली 55
बैंगनी सा रंग है मेरा, सिर पर हरी टोपी डाली, भूनो तो भरता बन जाऊं, चटखारे ले थाली।
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बैंगनपहेली 56
नारंगी रंग, लंबी नोक, मिट्टी में उग आती, खरगोश को सबसे प्यारी, हलवे में भी आती।
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गाजरपहेली 57
खट्टा-खट्टा पीला सा, शरबत में घुल जाए, दाल-सलाद पर निचोड़ो, स्वाद बढ़ा जाए।
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नींबूपहेली 58
छोटे-छोटे दाने मेरे, गुच्छों में लटकूं, हरे भी हूं, काले भी, सूखूं तो किशमिश बनूं।
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अंगूरपहेली 59
हरी-हरी फली के अंदर, छिपे हरे मोती, सर्दी में सब मिलकर छीलें, पनीर संग सब्ज़ी होती।
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मटरपहेली 60
लाल गाल, गोल है तन, रोज़ एक जो खाए, कहते हैं उस बच्चे से डॉक्टर दूर हो जाए।
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सेब
शरीर के अंगों की पहेलियां
पहेली 61
दो पड़ोसी साथ रहें, एक-दूजे को देख न पाएं, बीच में नाक की दीवार, पर पूरी दुनिया दिखलाएं।
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आंखेंपहेली 62
बत्तीस चौकीदार खड़े, बीच में बैठी रानी, रानी चखे हर स्वाद को, बोले मीठी बानी।
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जीभपहेली 63
मुट्ठी जितना आकार मेरा, धक-धक करता जाऊं, सोते-जागते ख़ून पहुंचाऊं, कभी न सुस्ताऊं।
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दिल (हृदय)पहेली 64
सिर के दोनों ओर लगे, बाली इनमें सजती, आवाज़ें सब इनसे आएं, जब भी घंटी बजती।
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कानपहेली 65
पांच भाई एक हथेली पर, सबका क़द है न्यारा, मिलकर पकड़ें कलम-कटोरी, काम करें ये सारा।
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उंगलियांपहेली 66
चेहरे के बीच एक पहाड़ी, नीचे दो सुरंग, ख़ुशबू इससे पहचानो, सांस चले इसके संग।
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नाकपहेली 67
सिर पर उगती काली खेती, कटे तो फिर उग आए, कंघी इसमें सैर करे, तेल इसे भी भाए।
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बालपहेली 68
दिन भर पूरा बोझ उठाते, जूतों में रहते बंद, दो भाई जो चलते रहते, कभी न होते मंद।
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पैरपहेली 69
खोलूं तो बोलूं, बंद करूं तो चुप, खाना जाता इसके अंदर, पानी भी गुपचुप।
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मुंहपहेली 70
उंगली के सिर पर टोपी, बढ़ती रहती रोज़, काटो तो भी दर्द न हो, बूझो इसकी खोज।
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नाख़ूनपहेली 71
बांह के बीच की कड़ी, मोड़ो तो मुड़ जाए, टकरा जाए मेज़ से तो सारी बांह झनझनाए।
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कोहनीपहेली 72
बाल उगें, टोपी पहनूं, सबसे ऊपर रहता, दिमाग़ मेरे अंदर बैठा, सोच-विचार सब करता।
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सिरपहेली 73
मुंह के दरवाज़े पर दो पट, लाल-लाल है रंग, मुस्कान इन्हीं पर खिलती, सीटी बजे इनके संग।
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होंठपहेली 74
कंधों से लटके दो साथी, हर काम में आगे, लिखें, खाएं, ताली बजाएं, सुबह सबसे पहले जागें।
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हाथपहेली 75
आंखों के ऊपर दो काली रेखाएं, हैरानी में उठ जाएं, गुस्से में ये सिकुड़ जाएं, बूझो क्या कहलाएं?
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भौंहें
प्रकृति की पहेलियां
पहेली 76
रात में चमकें आसमान में, गिनती में न आएं, दिन निकले तो छिप जाएं, टिमटिम गीत सुनाएं।
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तारेपहेली 77
आसमान में रुई के गोले, हवा संग उड़ते जाएं, काले हों तो गरजें-बरसें, सबको भिगो के जाएं।
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बादलपहेली 78
दिखती नहीं पर छू जाती, पत्ते-पत्ते हिलाए, पतंग इसी के कंधे बैठी ऊंचा उड़ती जाए।
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हवापहेली 79
ऊंचे पर्वत से कूद पड़े, शोर मचाए झर-झर, दूध जैसी धार बनाए, बहता जाए निरंतर।
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झरनापहेली 80
सर्दी की सुबह घास पर मोती बिखरे पाओ, सूरज जागे, ग़ायब हों, बूझो नाम बताओ।
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ओसपहेली 81
पांव धरती में गाड़े रहता, सिर से छूता आसमान, छाया, फल, लकड़ी सब दे, बदले में न मांगे दाम।
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पेड़पहेली 82
पानी मेरा खारा-खारा, लहरें उठें हज़ार, सारी नदियां मुझमें आकर मिल जाती हर बार।
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समुद्रपहेली 83
पहले चमकूं, फिर बादल गरजें, एक पल में खो जाऊं, बारिश की काली रातों में आसमान चमकाऊं।
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आकाशीय बिजलीपहेली 84
बर्फ़ की टोपी सिर पर पहने, सबसे ऊंचा खड़ा, नदियों का घर कहलाऊं, बादल से भी बड़ा।
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पहाड़ (पर्वत)पहेली 85
पहाड़ से निकलूं, सागर तक जाऊं, रास्ते में खेतों को पानी पिलाऊं।
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नदीपहेली 86
धूप में मेरे पीछे चले, अंधेरे में खो जाए, जितना भागो उतना भागे, कभी न पकड़ में आए।
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परछाईंपहेली 87
रेगिस्तान में मेरा सागर, मुट्ठी से फिसल जाऊं, समुद्र किनारे महल बनें, लहर आए बह जाऊं।
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रेतपहेली 88
कली से खिलकर हंसता, तितली मुझ पर आए, रंग-बिरंगा, ख़ुशबू वाला, बगिया को महकाए।
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फूलपहेली 89
सर्दी की सुबह छा जाए, सामने कुछ न दिखाए, धुएं जैसा, पर धुआं नहीं, धूप से भाग जाए।
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कोहरापहेली 90
लकड़ी खाकर बढ़ती जाऊं, पानी पीकर बुझ जाऊं, हाथ लगाओ तो जल जाओ, खाना रोज़ पकाऊं।
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आग
10 कठिन पहेलियां
पहेली 91
पैर नहीं पर देश घूमे, मुंह नहीं पर बात सुनाए, लिफ़ाफ़े में बंद होकर दूर बैठे का हाल बताए।
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चिट्ठीपहेली 92
जितना उसमें से निकालो, उतना बढ़ता जाए, मिट्टी ले लो, बड़ा बने, बूझो क्या कहलाए?
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गड्ढापहेली 93
देकर भी जो पास रहे, न छू सको न देख सको, टूट जाए तो दिल दुखे, बूझो उसको जो रख सको।
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वादापहेली 94
रोज़ कहते सब कि आएगा, पर कभी न आए पास, जब भी आए, आज बन जाए, बूझो इसका राज़ ख़ास।
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आने वाला कलपहेली 95
मेरा नाम ज़ुबां पे आए, उसी पल टूट जाऊं, कमरे में सब चुप बैठें, तब मैं ही छा जाऊं।
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ख़ामोशीपहेली 96
एक नगर में बारह गांव, हर गांव में तीस घर, हर घर में दिन-रात बसें, बूझो कौन है ये नगर?
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साल (वर्ष)पहेली 97
पैर नहीं पर भागे हरदम, पीछे कभी न आए, घड़ी इसकी चाल बताए, बूझो क्या कहलाए?
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समयपहेली 98
सबको मंज़िल तक ले जाऊं, ख़ुद एक क़दम न चलूं, दिन-रात सब मुझ पर दौड़ें, फिर भी जगह न बदलूं।
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सड़कपहेली 99
तीन अक्षर का नाम है मेरा, उलटा-सीधा एक, सागर की लहरों पर तैरूं, लादूं माल अनेक।
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जहाजपहेली 100
तीन अक्षर का फूल हूं, पानी में खिल जाऊं, बीच कटे तो 'कल' बनूं, अंत कटे तो 'कम' कहलाऊं।
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कमल
पहेली इमेज: डाउनलोड करें और भेजें
किसी भी कार्ड को सेव करके WhatsApp पर भेजें। उत्तर कार्ड में नीचे उल्टा लिखा है।
इन पहेलियों का इस्तेमाल कैसे करें
इन पहेलियों को कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। क्लास में टीचर रोज़ 10 पहेलियां बोर्ड पर लिखकर बच्चों से बूझवा सकते हैं। घर पर खाने के समय या सफ़र में बच्चों से एक-एक पहेली पूछिए और सही जवाब पर एक अंक दीजिए। पार्टी या किटी में दो टीमें बनाकर पहेली का मुक़ाबला भी बहुत मज़ेदार रहता है।
कठिन पहेली बूझने के लिए हर लाइन को अलग से पढ़िए और सोचिए कि कौन सी चीज़ हर संकेत पर फिट बैठती है। रंग, आकार, आवाज़ और काम जैसे संकेत लिख लीजिए। अगर दो जवाब मन में आएं तो देखिए कि कौन सा जवाब हर लाइन से मेल खाता है। छोटे बच्चों को इशारा देकर मदद कीजिए, जैसे "यह रसोई में मिलती है"।
टिप्स
- पहेली को धीरे-धीरे और दो बार पढ़कर सुनाइए, ताकि हर संकेत साफ़ सुनाई दे।
- बच्चों को जवाब बताने से पहले एक छोटा सा इशारा दीजिए, इससे सोचने की आदत बनती है।
- हर हफ़्ते 10 नई पहेलियां चुनिए और परिवार में छोटा सा पहेली मुक़ाबला रखिए।
और पहेलियां
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बच्चों के लिए अच्छी पहेली कौन सी है?
छोटे बच्चों के लिए वे पहेलियां सबसे अच्छी हैं जिनका जवाब उनकी रोज़ की ज़िंदगी से जुड़ा हो, जैसे चांद, गेंद, घड़ी या केला। इस पेज के आसान और जानवरों वाले हिस्से से शुरुआत कीजिए।
10 पहेलियां उत्तर सहित कहां मिलेंगी?
इस पेज का हर हिस्सा अपने आप में 10 से ज़्यादा पहेलियों का सेट है, और आख़िरी हिस्से में ठीक 10 कठिन पहेलियां उत्तर सहित दी गई हैं। आप किसी भी हिस्से से 10 या 20 पहेलियां चुनकर क्लास या घर में पूछ सकते हैं।
पहेली जल्दी कैसे बूझें?
हर लाइन में छिपे संकेत अलग करके देखिए, जैसे रंग, आकार, आवाज़ या काम। फिर सोचिए कि कौन सी एक चीज़ सब संकेतों पर ठीक बैठती है। अभ्यास से यह आदत बहुत तेज़ हो जाती है।
हिंदी पहेलियां बच्चों के लिए क्यों फ़ायदेमंद हैं?
पहेलियां बच्चों की सोचने की ताक़त, शब्द ज्ञान और ध्यान बढ़ाती हैं। तुकबंदी वाली पहेलियां याद भी जल्दी होती हैं और हिंदी पढ़ने में रुचि जगाती हैं।
क्या ये पहेलियां स्कूल में पूछी जा सकती हैं?
हां, ये सभी पहेलियां साफ़-सुथरी और सरल हिंदी में हैं। टीचर इन्हें प्रार्थना सभा, क्लास की शुरुआत या हिंदी दिवस के खेल में आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस पेज की हर पहेली Paheli World टीम ने लिखी और जांची है। How we make our riddles.









